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Jai Ho

चांडाल शब्द का अर्थ होता

* चांडाल शब्द का अर्थ होता है क्रूर कर्म करनेवाला, नीच कर्म करनेवाला. इस चांडाल शब्द पे से ज्योतिष -शास्त्र में एक योग है. जिसे गुरु चांडाल योग या विप्र योग कहा जाता है.राहू और केतु दोनों छाया ग्रह है. पुराणों में यह राक्षस है. राहू और केतु के लिए बड़े सर्प या अजगर की कल्पना करने में आती है. राहू सर्प का मस्तक है तो केतु सर्प की पूंछ. ज्योतिषशास्त्र में राहू -केतु दोनों पाप ग्रह है. अत: यह दोनों ग्रह जिस भाव में या जिस ग्रह के साथ हो उस भाव या उस ग्रह संबंधी अनिष्ठ फल दर्शाता है. यह दोनों ग्रह चांडाल जाती के है. इसलिए गुरु के साथ इनकी युति गुरु चांडाल या विप्र (गुरु) चांडाल ( राहू-केतु ) योग कहा जाता है.
* राहू-केतु जिस तरह गुरु के साथ चांडाल योग बनाते है इसी तरह अन्य ग्रहों के साथ चांडाल योग बनाते है जो निम्न प्रकार के है.
चांडाल योग, मात्र अशुभ नहीं होता, इस योग वाले जातक को आध्यात्मिक लाभ भी अनेक मिलते है..सिद्ध तंत्र गुरु की प्राप्ति होना, अतीन्द्रिय ज्ञान, धारा से विपरीत चलने की ताकत, अंधश्रधा का खण्डन करने का बल ये सब भी मिलता है चांडाल योग से
सामाजिक तौर पर श्मशान के डोम को या चिता जलाने में जो सहायक होता है शमशान का अधिकारी उसे ही चांडाल कहते है
इस योग की सबसे बड़ी समस्या ये है की व्यक्ति इच्छित ऊंचाई पर तो पहुच जाता है लेकिन उस पर टिके नहीं रहता वापिस निचे गिरता है और बार बार ऐसा होता है 0 से 10 और 10 से 0
लेकिन ऐसे योग वाला व्यक्ति तांत्रिक बना तो वो ना पाप सोचेगा ना पूण्य जो करना होगा कर ही देगा
बिना तिलक का ब्राह्मण भी चांडाल कहलता हे?
लेकिन ऐसे योग वाला व्यक्ति तांत्रिक बना तो वो ना पाप सोचेगा ना पूण्य जो करना होगा कर ही देगा

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