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कुबेर यंत्र Kuber Yantra in Hindi

कुबेर यंत्र Kuber Yantra in Hindi

शास्त्रों, पुराणों एवं हिन्दू धर्म के अनुसार माँ लक्ष्मी सम्पूर्ण प्रकार के धन और वैभव को प्रदान करने वाली देवी हैं | माँ लक्ष्मी के इस विशाल धन खजाने के रक्षक और द्वारपाल कुबेर देव को माना जाता है, इसीलिए लक्ष्मी माता की पूजा के साथ साथ कुबेर देव की भी पूजा उतनी ही आवश्यक है और कुबेर देव की पूजा करने के लिए सबसे सरल और उत्तम उपाय है कुबेर यंत्र | इनको प्रसन्न करने के लिए और धन का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कुबेर यंत्र को घर में पूर्ण विधि व शुद्धिकरण करके अपने भाग्य वृद्धि के लिए स्थापित करें|

kuber Yantra

कुबेर यंत्र की पूजा के नियम :

किसी शुभ दिन विशेषकर दीपावली या धनतेरस के दिन लक्ष्मीगणेश के पूजन के पश्चात, कुबेर यंत्र को मंदिर में या पूजा स्थल पर स्थापित करें अगर चाहें तो इस यंत्र को धन कोष में भी रख सकते हैं, जिसके अनेक लाभ हैं | परंतु धन कोष में कुबेर यंत्र को रखने के बाद प्रतिदिन इसकी पूजा दीप, धूप के साथ करनी होती है | कुबेर यंत्र को स्थापित करके इसका पूजन करने के लिए किसी भी व्यक्ति को अपनी कुंडली की जांच कराना जरूरी नही हैं | कोई भी व्यक्ति इस यंत्र को अपने घर में स्थापित करके इसकी पूजा कर सकता है |

कुबेर यंत्र की पूजा के लाभ एवं प्रभाव:

ऐसा माना जाता है कि कुबेर यंत्र संपूर्ण सकारात्मक ऊर्जाओं का स्रोत है अतः जिस व्यक्ति का राशि स्वामी बृहस्पति ( गुरु ) है, उसको इस कुबेर यंत्र को अपने घर अथवा कार्यालय में स्थपित करना चाहिए जिससे भाग्य में वृद्धि होती है तथा धन प्राप्ति के अवसर प्राप्त होते हैं | कुबेर यंत्र अनेकों कारणों से भी बहुत प्रभावी माना जाता है, अनुभवी इस बात को प्रमाणित करते हैं :

. कुबेर यंत्र की पूजा करने से धन और आय में अकारण वृद्धि होती है

. स्वास्थय के लिए सबसे अधिक प्रभावशाली, स्वर्ण अथवा रजत पत्र पर निर्मित कुबेर यंत्र माना जाता है | सोने या चांदी के पत्रों के अलावा भोजपत्र पर निर्मित कुबेर यंत्र की भी स्थापना की जा सकती है |

कुबेर यंत्र स्थापना के लिए मंत्र:

ऊँ वैश्रवणाय स्वाहा

अथवा

ऊँ कुबेराय नमः

इन मंत्रों को दस हजार अथवा अपनी श्रद्धानुसार सवा लाख बार जाप बताया गया है जिससे अपार धन और सौभाग्य की प्राप्ति होती है | स्थापना के लिए अत्यंत आवश्यक बात ये है कि कुबेर यंत्र को पूर्णतः शुद्ध और सिद्ध किये बिना इसका कोई लाभ नही होगा और बेहतर होगा ये कार्य किसी विद्वान् पंडित या अपने पुरोहित से करवाएं जिससे इसकी स्थापना और पूजा का सम्पूर्ण लाभ मिल सके |

 

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