DharmShakti

Jai Ho

महामृत्युंजय मंत्र Mahamrityunjaya Mantra in Hindi

शिव सत्य हैं और वह परमेश्वर हैं, देवों के देव महादेव, उत्कृष्ट भगवान हैं | शिवभक्तों का मानना है कि शिव स्वयंभू हैं जिसका अर्थ है स्वयं बनाया हुआ | ये भी सत्य है कि भगवान भोलेनाथ नाम के अनुरूप ही भोले हैं, दयावान हैं, अतिशीघ्र प्रसन्न होकर के भक्तों को वरदान देते हैं चाहे वो धन, वित्त, स्वस्थ्य अथवा ख़ुशी या शक्ति हो, हर प्रकार की इच्छाओं की पूर्ति करते हैं जिससे भक्तों का जींवन सुखमय होता है तथा जीवन में आने वाली कठिनाइयों से मुक्ति मिल जाती है |

mahamrityunjaya Mantra
भगवान शिव को प्रसन्न करना सरल है परंतु महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि शिव पूजन किस प्रकार किया जाय जिससे भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न हो कर आशीर्वाद प्रदान करें | सतयुग में, मूर्ति पूजा अत्यंत सहायक मानी जाती थी किन्तु कलयुग में केवल मूर्ति पूजा ही पर्याप्त नहीं है इसके साथ कुछ विशेष मन्त्रों का उल्लेख किया गया है | भविष्य पुराण और ग्रंथों में बताया गया है कि सुख और मन की अपार शान्ति के लिए मंत्र का जाप करना चाहिए और मंत्र जाप करने से मनचाहा फल मिलता है | इसी प्रकार से शिव जी का यह विशेष मंत्र जिसे महामृत्युंजय मंत्र के नाम से जाना जाता है इसके नियमित जाप से धन, संपत्ति, दीर्घायु और सुखमय जीवन का वरदान प्राप्त होता है | महामृत्युंजय मंत्र के जपने से सकारात्मक कम्पन उत्पन्न होते हैं जिससे मन को शांति का अनुभव होता है तथा जीवन की सब आपदाओं से रक्षा करता है |

ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकिमव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।

मंत्र का शाब्दिक अर्थ:-

ॐ – हिन्दू धर्म अर्थात हिन्दू, बौध्द तथा जैन में ॐ एक पवित्र शब्दांश है जिसका उच्चारण भगवान शिव के लिए किया जाता है,
त्रयम्बकं – त्रय अर्थात तीन, अम्बक अर्थात नेत्र जिसका पूर्ण अर्थ है तीन नेत्र से सुशोभित एक प्रभु,
यजामहे – हम पूजते हैं, आदर करते, प्रेम करते हैं तथा जिनके भय से कांपते भी हैं,
सुगंधिम – मीठी महक अथवा सुगंध
पुष्टि – समृद्ध. संपन्न, जीवन की परिपूर्णता,
वर्धनम – एक जो हमको शक्ति देते हैं, पोषण करते हैं, हर प्रकार की वृद्धि( स्वास्थ्य, धन और सुख ) के एक मात्र स्रोत हैं,
उर्वारुकिमव – ककड़ी या तरबूज ( शाब्दिक और कर्मकारक ) उर्वारुकिमव पूर्ण शब्द का एक साथ उच्चारण जिसका अर्थ है मैं एक बेल के लिए ककड़ी की भांति खड़ा हुआ हूँ,
मृत्योर मोक्षिय – मृत्यु के भय से मुक्ति तथा मोक्ष की प्राप्ति,
मामृतात – अमृत
महामृत्युंजय मंत्र का महत्त्व:-

महामृत्युंजय मंत्र एक बहुत ही प्रभावशाली मंत्र है जिसके अनेकों लाभ हैं | यदि कोई व्यक्ति जिसकी कुंडली में मास, गोचर, दशा, अंतर्दशा और किसी अन्य प्रकार कि समस्या बानी हुई है तो इस मंत्र के नियमित जाप से इन सब से छुटकारा मिल जाता है| यदि कोई व्यक्ति किसी बीमारी से परेशान है तो उसका उपाय भी इसी महामृत्युंजय मंत्र में छुपा हुआ है | इस महामृत्युंजय मंत्र का जाप दीर्घायु प्रदान करता है यदि कोई व्यक्ति इस मंत्र को पूर्ण विश्वास और श्रद्धा से जपता है |
महामृत्युंजय मंत्र के जाप करने से व्यक्ति अकाल मृत्यु के भय से मुक्त होता है और उसकी मृत्यु एक निश्चित समय के किये टल जाती है |
महामृत्युंजय मंत्र का जाप पारिवारिक कलह, संपत्तियों का बंटवारा आदि में सहायक है और यदि कोई महामारी से पीड़ित है उस व्यक्ति के लिए भी जीवन अमृत के समान है | यदि आर्थिक तंगी से जूझ रहे है या व्यवसाय में घाटा, नुकसान आदि सब झेल रहे हैं, तो महामृत्युंजय मंत्र का जाप लाभदायक है | शिव जी का यह मंत्र चिकित्सा में भी पूर्ण लाभदायक सिद्ध हुआ है, इस मंत्र में चमत्कारी शक्ति है | यह माना गया है कि यह महामृत्युंजय मंत्र का जाप एक अनोखे कम्पन उत्पन्न करता है जो मानव शरीर में हितकारी है मन की शांति होती है तथा मृत्यु का भय नहीं सताता जिससे मनुष्य जन्म और मृत्यु के चक्कर से मुक्त हो जाता है और इसीलिए इसको मोक्ष मंत्र भी कहा जाता है |

महामृत्युंजय मंत्र का जाप कैसे करें !

शास्त्रों के अनुसार, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने के लिए सुबह का समय अर्थात २ बजे से ४ बजे के बीच का समय सबसे अच्छा बताया गया है | पर अगर आप इस समय जाप करने में असमर्थ हैं तो स्नान आदि के बाद सारे कार्य पूर्ण होने पर इस मंत्र का जाप पूर्ण एकाग्रता के साथ दिन में कम से कम पांच बार करें | महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय एक रुद्राक्ष माला का उपयोग अत्यंत शुभ और लाभदायक माना जाता है | यह रुद्राक्ष माला आपको याद रखने में सहायता करेगी कि आपने मंत्र का जाप कितनी बार किया है, आपको यह याद रखने की विशेष आवश्यकता है कि आपका मंत्र जाप पिछले दिन के जाप की तुलना में कम न हो |

महामृत्युंजय मंत्र परम पवित्र और दैविक है इसका जाप पूर्ण शुद्ध हो कर करना चाहिए, मंत्र जपते समय इसके कम्पन पर पूर्ण ध्यान केंद्रित करना और उसके अर्थ को समझना अत्यंत आवश्यक होता है | किसी भी तरह के आवाज और बाहरी कारकों को अपने पास फटकने ना दें अथवा उस ओर ध्यान ना दें | यदि यह जाप शिव मूर्ति, शिवलिंग या महामृत्युंजय यंत्र के समक्ष किया जाय तो बहुत आदर्श माना जाता है | यदि आपने मांसाहार त्याग दिया है और महामृत्युंजय मंत्र का जाप आप नियमित करते हैं तो आप इसका परिणाम अतिशीघ्र देख सकेंगे और परम कृपालु भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होगा |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

DharmShakti © 2017
}
error: Content is protected !!